अथर्ववेद कर्ज को मानसिक और आध्यात्मिक बोझ मानता है। इसके उलट राजस्थानी अपनी जरूरतों को टालने के बजाय कर्ज लेना बेहतर समझ रहे हैं। यही वजह है कि प्रदेश के 83 साल के बैंकिंग इतिहास में पहली बार बैंकों की कुल जमा के मुकाबले बांटा गया कर्ज ज्यादा हो गया।...



