राजस्थान में 2015 से अब तक केवल 84 मृतक अंगदान हुए हैं, जबकि 1,022 मरीज प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। जागरूकता की कमी और भ्रांतियां अंगदान बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं।