उदयपुर की दर्जनों कॉलोनियों में हजारों परिवार वर्षों से बिना पट्टों और मूलभूत सुविधाओं के रह रहे हैं, जबकि नियमन की फाइलें तकनीकी और कानूनी अड़चनों में अटकी हैं।