सीबीएफसी फिल्मों को प्रमाणित कर रहा है या उन कहानियों को सेंसर कर रहा है जो उसे असहज लगती हैं? संघर्षग्रस्त इलाके में आदिवासियों की प्रेम कहानी दिखाना नक्सलवाद का समर्थन माना जाएगा तो रचनात्मक स्वतंत्रता कहां बचेगी? 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क लखनऊ। एक पत्रकार ने कलम उठाई तो सत्ता परेशान...