जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र में भारत के किसान अधिकारों, पारंपरिक कृषि ज्ञान और ग्रामीण नवाचार से जुड़े अनुभवों को सामने रखा गया। वक्ता ने किसानों को जैव विविधता और कृषि विरासत के संरक्षक के रूप में पहचानने की जरूरत बताई।
