जिस सफर में कभी लोगों ने कहा “नहीं हो पाएगा”, उसी सफर ने आज हॉस्पिटैलिटी, फूड, ट्रैवल, मीडिया, टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेवाओं तक पहुंचाई एक नई पहचान
रायली से पहचान तक: तानों, संघर्ष और असफलताओं के बीच राजेंद्र सिंह तंवर ने शून्य से खड़ी की अपनी सफलता की कहानी



