नीट-यूजी काउंसलिंग के तीसरे राउंड के बाद राजस्थान के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें भर गईं, जबकि निजी कॉलेजों में एमबीबीएस की 1,039 सीटें खाली हैं। निजी कॉलेजों की अधिक फीस और सख्त नियम इसकी प्रमुख वजह माने जा रहे हैं।