नृत्य, कथाएँ, शिल्पकला, खेल, पर्व, उत्सव, परम्पराएँ… ये अमूर्त सांस्कृतिक विरासत, हमारे दैनिक जीवन में अनेक रूपों में प्रदर्शित होती है. ये हमसे पहले आई पीढ़ियों की धरोहर व उनका प्रतिबिम्ब होने के साथ-साथ वर्तमान में हमारी पहचान का सार भी हैं. हर वर्ष, 17 अक्टूबर को इसी विषय पर...