हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों से जुड़ी रिट याचिकाओं को अलग से ‘क्रिमिनल रिट पिटीशन’ के रूप में दर्ज करने की पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी। कोर्ट ने जुलाई 2026 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें ऐसी याचिकाओं को सामान्य रिट के रूप में दर्ज करने के निर्देश थे।