झालावाड़ और आसपास के क्षेत्रों में पारंपरिक शहनाई-नगाड़ा कला आज अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है। कभी राजगढ़ों, किलों और मांगलिक आयोजनों की पहचान रही यह लोक कला आधुनिक दौर में अपनी चमक खोती जा रही है। कार्यक्रमों में अवसर कम होने और सरकारी सहयोग के अभाव में...