38 वर्षीय ऊषा फौजदार की कहानी केवल बीमारी से उबरने की नहीं, बल्कि अपने सपनों के लिए लड़ने और दूसरों के जीवन में उम्मीद जगाने की भी है। ठेठ ग्रामीण परिवेश, पारिवारिक उपेक्षा, आर्थिक तंगी और गंभीर बीमारी के बीच उन्होंने हार नहीं मानी। एमए-बीएड करने के बाद शिक्षक बनने...