जांच में यह भी सामने आया कि कुछ संस्थानों में छात्रों की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए ‘रबर के अंगूठे’ का इस्तेमाल कर बायोमेट्रिक अटेंडेंस ली जाती थी, जिससे फर्जी अटेंडेंस बनाई जाती रही.