यह केवल मौसम का मिजाज या तकनीकी खराबी का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और ‘घोटाले’ की बू देता है। मेंटेनेंस के नाम पर बजट ठिकाने लगा दिया गया, लेकिन जब जमीन पर तार टूटने और ट्रांसफार्मर जलने की बारी आई, तो पूरा सिस्टम वेंटिलेटर पर नजर आया।
बिजली संकट पर बड़ा इनसाइडर विश्लेषण: जब डिमांड नहीं बढ़ी और सोलर प्रोडक्शन चालू है… तो फिर राजस्थान में क्यों मचा है ‘पॉवर कट’ पर हाहाकार?




