राजस्थान के लोकतंत्र का सबसे त्रासद और घिनौना यथार्थ यही है कि यहां जनता जिस क्षण वोट डालकर अपनी उंगली की स्याही सुखा रही होती है, उसी क्षण उसके चुने जाने वाले नुमाइंदों के गले में दलीय अविश्वास का पट्टा कस दिया जाता है।