“घर की तंगी दूर करने निकला था मेरा समद… सोचा था दो पैसे कमाएगा तो परिवार की सांसें आसानी से चलेंगी। ब्याज पर कर्ज लेकर बेटे को परदेस भेजा था, लेकिन क्या खबर थी कि वहां खुशियों की जगह बदकिस्मती इंतजार कर रही है। मैं मरूं या जीऊं, बस एक...