65 साल से बंद पड़ी ‘पगड़ी की रस्म’ इस जून में मारवाड़ के एक गांव में फिर निभाई गई. इस रस्म में एक स्कूली छात्रा को उत्तराधिकारी घोषित किया गया. इससे राजपूत समाज में परंपरा और विरासत को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है.