राजस्थान शिक्षा विभाग की लापरवाही से ₹7 करोड़ की 10 लाख किताबें रद्दी हो गईं. पाठ्यक्रम बदलने के बावजूद, विशेषकर सातवीं कक्षा की पुस्तकें बड़ी संख्या में छापी गईं, जो अब गोदामों में बेकार पड़ी हैं. यह सरकारी धन की बर्बादी और विभाग की योजना, निगरानी व जवाबदेही पर गंभीर...




