छापोली और मंडावरा के आठ परिवारों के लिए सोमवार का दिन ऐसी त्रासदी लेकर आया, जिसका दर्द शायद जिंदगीभर कम नहीं होगा। कहीं मां की गोद सूनी हो गई तो कहीं बूढ़े माता-पिता का सहारा छिन गया।