अशोक गहलोत ने कहा कि मदन राठौड़ को बिना किसी किंतु-परंतु के ईमानदारी से अपनी गलती स्वीकार करते हुए स्पष्ट रूप से खेद जताना चाहिए। उन्हें माफी मांगते हुए यह स्वीकार करना चाहिए कि उन्होंने ऐसी बात कही है, जो उन्हें नहीं कहनी चाहिए थी।